Kargil - Sanku -Kargil

कारगिल के बस्पा गेस्ट हाउस के मालिक से बात हुई काफी । हम खाना खाकर आये तो उन्होने बाइक को सामने की दुकान में खडी करवाकर शटर बंद कर दि...

कारगिल के बस्पा गेस्ट हाउस के मालिक से बात हुई काफी । हम खाना खाकर आये तो उन्होने बाइक को सामने की दुकान में खडी करवाकर शटर बंद कर दिया । चाबी देने के नाम पर वे बोले कि मै सुबह 4 बजे जग जाता हूं तो आपको जिस समय ले जाना हो बता देना । उनसे थोडी जानकारी ली कि हम जंस्कार वैल्ली में किस तरह जायें और रोड वगैरा कैसी है । एक बार को तो पदुम तक जाने का इरादा था पर वो एक तरफ से 274 किलोमीटर के करीब है तो एक दिन तो पूरा लग सकता है जाने में । पदुम जाने का फायदा तभी है जब आप वहां पर कोई ट्रैक भी करते आयें इसलिये आज के दिन रंगदुम और ड्रंग ड्रंग ग्लेशियर तक जाने का टारगेट बनाया था । वहां तक जाने का मतलब था 300 के आसपास चलना । इसमें सुरू घाटी और ग्लेशियर के अलावा रंगदुम और पनिखर जैसी सुंदर जगहो के दर्शन कर लेते और एक दर्रे पेन्जीला को भी पार करके वापस मुड जाना था । इस दर्रे को पार करना भी मुख्य था इसलिये सुबह चलना जरूरी था ।

तो इस पूरी यात्रा में दूसरी बार सुबह सवेरे चलने का तय हुआ । एक बार हम घर से चले थे सुबह के 4 बजे । वैसे यहां पर 4 बजे उजाला हो जाता है वो भी बढिया वाला इसलिये यहां तो तीन बजे भी चलने में बुराई नही है । रात को कमरे में ही ये भी सलाह हुई कि हम अपना साइड बैग यहीं होटल में ही रख देंगें । कमरे में नही रखेंगें ताकि वो बुक ना रहे पर गेस्ट हाउस के मालिक से कहकर एक दूसरी जगह रख देंगें । टैंट बाइक पर बंधा हुआ है और स्लीपिंग बैग भी तो उन्हे लेकर चलेंगें । गेस्ट हाउस वालो का कार्ड ले लिया और उनसे बोल दिया कि हम अगर समय रहते कारगिल आ गये तो आपके यहां पर रूकेंगें अन्यथा कहीं टैंट लगा लेंगें । वैसे हमें पूरा अंदाजा था कि हम एक ​ही दिन में कर लेंगें क्योंकि सुबह 4 बजे से निकलने के बाद कम से कम 16 घंटे मिलते हैं तो बुरी से बुरी सडक पर 20 का औसत आराम से आ जाता है और सवेरे चलने वाले की जीत इसीलिये हर जगह होती है ।चूंकि गेस्ट हाउस वालो ने सुबह 4 बजे उठने की बात कही ​थी तो हमने उन्हे ही कह दिया उठाने को । सुबह 4 बजे उन्होने आवाज लगा दी और हम उठकर तैयार होने लगे । पांच बजे तक हम निकल लिये गेस्ट हाउस से । हमने अपना साइड बैग उन्ही को दे दिये रखने के लिये ।


पांच बज गये थे हमें निकलने में और हम उसी रास्ते को निकले जिससे शाम होकर आये थे । अभी तो कुछ भी खुला नही था दुकाने वगैरह पर हां रास्ते में लोग दिखने लगे थे । जैसा कि मैने बताया कि उजाला तो चार बजे ही हो गया था इसलिये कारगिल में तो काफी लोग दिखायी दिये । इसके बाद हम जंस्कार वाली सडक पर चल दिये । कारगिल से सांकू 40 किलोमीटर है और सडक बहुत बढिया स्थिति में है । सांकू से करीब 5 किलोमीटर बाद सडक खत्म हो जाती है और कच्ची रोड पर ही चलन होता है । 40 किलोमीटर को एक घंटा नही लगना था पर कारगिल से निकलते ही बार बार रूकना शुरू हो गया । एक तो सांकू तक बहुत सारे गांव आते हैं और दूसरी बात नदी सडक के साथ साथ चल रही होती है । ऐसे में बर्फ से लदे ढके पहाड और नीचे बहती नदी सुंदर प्राकृतिक दृश्य बनाते हैं । एक काले सफेद रंग की चिडिया ज्यों कारगिल से मिलनी शुरू हुई तो भरपूर संख्या में मिलती ही रहती है । ऐसा लगता है कि यहां पर कोई और चिडिया नही रहती । रास्ते में पडने वाले गांवो में पूरी हरियाली है और यहां पर नदी के किनारे किनारे पानी की एक और नाली बना दी गयी है जिसमें गांव वाले अपने कपडे धोने आदि के काम करते हैं । शायद यही पानी सिंचाई के लिये भी उपयोग हो रहा होेगा ।

यहीं पर एक दुकान खुली दिख गयी और उस पर से हमने फ्रूटी ले ली और साथ ही रियल का 1 लीटर का जूस भी । कुछ बिस्कुट के पैकेट आदि ले लिये और हो गया नाश्ते का इंतजाम । अभी पता नही रैस्टोरैंट कहां पर मिलेगा तब तक इन्हे पीकर शांति तो रहेगी । यहां इस एरिया में मुझे इतना सामान मिलने की उम्मीद नही थी जैसा कि कहा जाता है कि वहां पर कुछ नही मिलेगा आदि आदि । सांकू से कुछ पहले कश्मीर यूनिवर्सिटी का कैम्पस है शायद जो कि बहुत ही सुंदर जगह पर है और यहां पर भी काफी देर रूकना हुआ । इसके बाद सांकू दिखायी दिया ​करीब 5 किलोमीटर पहले से । उपर से बर्फ से ढकी चोटी और नीचे हरा भरा सांकू । नजारा इतना बढिया था कि हम पन्द्रह मिनट यहीं से इसे निहारते रहे ।

सात बज चुके थे यानि दो घंटे में हम 35 किलोमीटर ही आये थे आप अंदाजा लगा सकते हो कि कितनी खूबसूरत जगह है ये । सात बजे हम यहां से चले और वो जो हरियाली पहाड के नीचे दिख रही थी उसमें प्रवेश कर गये । सांकू यहां काफी बडी जगह है । फिलहाल तो बाजार वगैरा खुला हुआ नही था और भीड भाड भी नही थी सो हम आगे निकल गये । एक जगह भेडो ने रास्ता रोका हुआ था । उनके निकलने के बाद हम थोडा आगे जाकर नदी पर उल्टे हाथ पर बने पुल से नदी की दूसरी तरफ हो गये । अब तक सुरू नदी हमारे बांयी ओर थी और अब दांयी ओर आ गयी थी ।

ऐसी हरी भरी सडके कहां मिलती हैं जैसी सांकू और उसके आसपास से गुजरते हुए महसूस हो रहा था । सांकू के बाद पुल पार करने के बाद दो किलोमीटर हम आ गये थे । सडक अभी भी बढिया ही थी और मै उसके बावजूद भी 40 की स्पीड से ही बाइक चला रहा था कि हम अचानक से गिर पडे । बस इतना ही दिखा कि वो एक मारूति कार थी ग्रे कलर की और वो एक सैकेंड भी नही रूका । हमारी बाइक में कार ने साइड मार दी थी और हम दोनो बहुत दूर तक घिसटते चले गये । सब कुछ सैकेंडो का खेल हुआ था और हम समझ ही नही पाये कि ये क्या हुआ । अक्सर आदमी सामने से आने वाली हर चीज से सावधान रहता है पर हम अंजान थे और एकदम से सडक पर गिरे पडे थे ।

सडक की एक साइड में हैलमेंट और अन्य सामान बिखरे पडे थे । एक मोटरसाईकिल वाला जो कि सामने से आया वो रूका । मै सडक की सीधे हाथ वाली साइड पर था और मेरा पैर बाइक के नीचे दबा था । मैने सामने मिश्रा जी को देखा जिनके मुंह पर खून ही खून था और नाक और होंठो के पास खून बहुत खतरनाक लग रहा था । मोटरसाईकिल वाले ने अपनी बाइक रोककर हमारी मोटरसाईकिल को उठाने में मदद की । मैने देखा कि मेरा लोअर फट गया था , विंडशीटर फट गयी थी और मेरी जांघ और घुटने से खून बह रहा था पर मेरा सिर और मेरा चेहरा हैलमेट की वजह से सुरक्षित था । मिश्रा जी का चेहरा देख कर ऐसा लग रहा था कि मुझे चक्कर आ जायेगा । उधर बाइक वाला हमसे बार बार पूछ रहा था कि कौन सा वाहन था और नम्बर नोट किया क्या

इसी बीच एक दो कार और आयी सामने से और वे भी गाडी के बारे में पूछताछ करने लगे । मै गाडी का नम्बर नही देख पाया था क्योंकि ये सब अचानक से हुआ था । मिश्रा जी को ये चोट इसलिये लगी क्योंकि उन्होने उस समय हैलमेट नही लगाया हुआ था और वे मेरा मोबाईल लेकर फोटो और वीडियो बना रहे थे ।

लोग हमसे कार के बारे में पूछ रहे थे और हम अपना सामान देख रहे थे । कैमरा और टैंक बैग अलग पडे थे जिन्हे उठाकर हमने वापस एक जगह रख लिया । मिश्रा जी का हैलमेट का शीशा टूट गया था । उनके घुटने और कंधे में भी चोट लगी थी । मेरे कंधे और कमर में भी हल्की सी गुम चोट थी । पहले मिश्रा जी की चोट को दिखाना जरूरी था । बाइक वाले से पूछा तो उसने बताया कि सांकू में ही अस्पताल है । सांकू यहां से 5 किलोमीटर है । मैने बाइक को देखा । बाइक में पूरी साइड पर निशान तो थे ही साथ ही फुटरेस्ट टूट गया था जो कि ब्रेक लगाने के लिये पैर के पास जरूरी होता है । बाइक आठ दस किक लगाने के बाद स्टार्ट हो गयी और हमने अपना सामान रखना शुरू किया । उसके बाद हमने सांकू की तरफ बाइक मोड ली । मिश्रा जी का चेहरे का खून रूका हुआ था अब ।

सर्दी में अक्सर खून जम जाता है । मिश्रा जी ने जरा सी भी हिम्मत नही खोयी थी और वे तुरंत चल पडे । पुल पार करने के बाद मिश्रा जी ने मुझे रोका कि आपका फोन नही है । मेरा फोन मिश्रा जी अपने हाथ में लेकर उससे वीडियो और फोटो खींच रहे थे । हमने बाइक वापस मोडी । बाइक को बिना फुटरेस्ट के चलाना दिक्कत भरा हो रहा था । हम वापिस फिर से उसी जगह पर पहुंचे और बाइक खडी करके फोन ढूंढना शुरू किया । फोन मिल गया वो एक साइड में जा गिरा था और कवर से निकलकर फोन अलग पडा हुआ था पर कवर की वजह से फोन की स्क्रीन या फोन को दिक्कत नही हुई थी

फिर से सांकू की तरफ चले और दस मिनट में ही सांकू जा पहुचे । अब यहां पर दुकाने खुल रही थी । हमने एक दो जगह डाक्टर के बारे में पूछा तो हमारी हालत देखकर एक आदमी ने कहा कि आप अस्पताल जाओ सरकारी । अस्पताल सडक के पास में ही था और काफी बडा बना हुआ था । हमने बाइक रोकी और अस्पताल गये जहां पर आदमी तक दिखाई नही दे रहा था । काफी आवाज देने पर एक आदमी निकलकर आया । यहां पर डाक्टर और अन्य बंदो को रहने के लिये यहीं पर सुविधा दी हुई है । उसके बाद तो उस बंदे ने जोर जोर से आवाज लगायी और दो तीन आदमी और एक औरत आ गये । अस्पताल में अंदर जाने के लिये भी जूते निकालने जरूरी थे और उस समय हमसे जूते निकालने का काम ही नही हो रहा था । जैसे तैसे जूते निकाले और उसके बाद हम दोनो को टेबल पर बिठाकर डाक्टर ने पहले तो चोट को साफ किया और उसके बाद दवाई लगाकर पटटी वगैरा की । मिश्रा जी की नाक पर जो चोट थी उस पर ना तो दवाई लगायी जा सकती थी और ना ही पटटी की जा सकती थी ।


Leh laddakh-



Beautiful Kargil
कारगिल क्षेत्र में सबसे ज्यादा पाई जाने वाली चिडिया
सांकू की ओर पहला कदम और रूक जाओ
पहले फोटो खिंचाओ फिर चलेंगें
खूबसूरती बेइंतहा
खूबसूरती बेइंतहा
खूबसूरती बेइंतहा
बर्फ की चोटी के नीचे तलहटी में सांकू है
sankoo
aur main
one more pose

अगले 5 फोटो मोबाईल से लिये गये हैं
रास्ते में भेडो का झुंड फोटो मोबाईल से
यही पुल के बाद नदी पार करके उल्टे हाथ पर चलना है
मेरे पैर की चोट
मिश्रा जी ​हास्पिटल में
का​रगिल में बाइक की दुकान पर
पीछे बाइक वाला है
सांकू हास्पिटल

COMMENTS

BLOGGER: 10
  1. त्यागी जी आज की यात्रा का दिन तो थोड़ा दुखद रहा आपका लेकिन चलो बहुत अच्छी बात है आपने हिम्मत नहीं हारी भाई

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  2. बहुत बढ़िया वर्णन लेकिन जो आपका accident हुआ वो पीड़ादायक था

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  3. बहुत बढ़िया वर्णन लेकिन जो आपका accident हुआ वो पीड़ादायक था

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  4. गिरते हैं शह सवार ही मैदानें जंग में....
    प्रशंशनीय है आप दोनों का हौंसला 👍

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  5. कोई बात नहीं त्यागी जी, ऐसे छोटे-मोटे हादसे हमारा रास्ता नहीं रोक सकते.

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  6. कोई बात नहीं त्यागी जी, ऐसे छोटे-मोटे हादसे हमारा रास्ता नहीं रोक सकते.

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  7. हिम्मत ऐ मर्दा मदद ऐ खुदा ,,,,, बहुत हौसला रखा आप दोनों ने :)

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  8. ओह ! लेकिन कभी कभी होता है

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  9. आपके साथ साथ मैंने भी कारगिल की यात्रा कर ली, बहुत सुन्दर तरीके से लिखा है, फोटो भी बहुत सुन्दर है, बाइक से यात्रा में प्रकृति को काफी नजदीक से देखने का मौका मिलता है, आज की यात्रा में आप लोगों को चोट लग गया जो कि दुखद है, अपनी तरफ से पूरी सावधानी बरतने के बाद भी दूसरों की गलती से दुर्घटना हो जाती है

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