Varansi , Kashi, Banaras

किसी काम के सिलसिले में मेरा और लवी का वाराणसी या बनारस जाना हुआ । इसके अलावा एक बार मै अपने एक मित्र के साथ भी बनारस दो दिन के लिये गया ।...

किसी काम के सिलसिले में मेरा और लवी का वाराणसी या बनारस जाना हुआ । इसके अलावा एक बार मै अपने एक मित्र के साथ भी बनारस दो दिन के लिये गया । इन दिनो में जब भी वक्त मिला हम घूमने निकल पडे और वाराणसी , सारनाथ और गया जी ,बिहार, में घूमें । मै इन्ही जगहो पर आपकेा घुमाने चल रहा हूं । तो आइये सबसे पहले शिव की नगरी काशी में

वाराणसी या काशी शहर वाराणसी भगवान शिव का स्थान , हिंदुओ की पावन तीर्थ नगरी ,गंगा के किनारे पर बसी प्राचीन नगरी में से एक है । इसे काशी भी कहा जाता है ।
दो नदियो वरूणा और असि के मध्य बसा होने के कारण इसका नाम वाराणसी पडा ऐसा भी कहा जाता है और इसका वर्णन पुराणो और रामायण और महाभारत आदि में भी मिलता है । मोक्षदायिनी गंगा के किनारे बसी काशी की महत्ता ऐसी है कि यहां प्राण त्याग करने से मुक्ति मिल जाती है । कहते हैं कि भगवान शिव मरते हुए प्राणी के कान में तारक मंत्र का उपदेश करते हैं जिससे वह आवागमन के चक्र से छूट जाता हैकहते हैं कि प्रलय काल में भी काशी का लोप नही होता उस समय शिव जो कि प्रलय के करने वाले हैं इसे अपने त्रिशूल पर धारण कर लेते हैं और सृष्टि काल आने पर इसे नीचे उतार देते हैं । ऐसी भी पौराणिक कथा है कि भगवान विष्णु ने सृष्टि उत्पन्न करने की कामना से तपस्या करके यहीं आशुतोष को प्रसन्न किया था और उनके सोने पर उनके नाभि से ब्रहमा उत्पन्न हुऐ जिन्होने सृष्टि की रचना की । मत्सय पुराण में कहा गया है कि जप , ध्यान और ज्ञान से रहित एवं दुखी पीडित जनो के लिये काशी ही एकमात्र गति है और यहां पांच तीर्थ हैं दशाश्वमेघ् , लोलार्ककुंड,बिंदुमाधव , केशव और मणिकर्णिका इन्ही को अविमुक्त क्षेत्र कहते हैं

घाट वाराणसी में गंगा जी की आकृति धनुष के जैसी है और सभी घाटो का मुख अधिकतर पूर्व की ओर हे तो सूर्योदय के समय घाटो पर पहली किरण दस्तक देती है । वाराणसी में उत्तर से लेकर दक्षिण तक सौ से अधिक घाट हैं । इनमें से दशाश्वमेघ,केदार,मणिकर्णिकाऔर हरिशचन्द्र घाट प्रमुख हैं । मणिकर्णिका घाट पर चिताऐं हमेशा जलती रहती हैं क्योंकि केवल बनारस और उसके आस पास ही नही बल्कि देश के कोने कोने से और कभी कभी तो बडे मशहूर लोगो तक की अंत्येष्टि भी यहीं की जाती है।यहां के ज्यादातर घाटो में हर कोई किसी न किसी धार्मिक कथा से जुडा हुआ है ।वाराणसी आने वालो को यहां का अस्सी घाट जरूर देखना चाहिये जहां पर गंगा जी में स्नान करने के बाद शिवलिंग की पूजा करते हैं अस्सी घाट का वर्णन मत्सय पुराण ,पदम पुराण और कूर्म पुराण आदि हिंदू ग्रंथो में आया है ऐसा भी कहा जाता है कि तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना इसी घाट पर की थी ।



दशाश्वमेघ घाट वाराणसी का सबसे ज्यादा तीर्थयात्रियो द्धारा देखा जाने वाला घाट है । घाट काफी सुंदर है यहां पर शाम के समय होने वाली आरती वाराणसी का मुख्य आकर्षण है । अब इसका रूप इतना सुंदर बना दिया गया है कि ये हरिद्धार की आरती से भी सुंदर लगने लगी है अगर और समय मिले तो दरभंगा घाट और दुर्गा मंदिर, हनुमान घाट ,मनमंदिर घाट ,हरिश्चन्द्र घाट ,तुलसी घाट देख लेने चाहिये । अगर समय कम हो तो हमारी तरह नाव तय करके गंगा जी की सैर भी करो और घाटो के भी दर्शन कर लो क्योंकि ज्यादातर घाटो पर नहाने के अतिरिक्त और कुछ खास नही है पर दशाश्वमेघ् घाट को देखना जरूर बनता है दिन में भी और शाम की आरती को भी शाम को हमने आरती देखी तो उसका कुछ अलग ही मजा था । जब आरती होने लगती है तो इसका पूरी तरह आनंद नही लिया जाता क्योंकि आरती गंगा जी की तरफ को मुंह करके की जाती है तो ज्यादातर लोगो को पूरा आनंद दिलाने के लिये नावें बुक हो जाती हैं जो गंगाजी के अंदर जाकर एक दूसरे से मिलाकर खडी हो जाती है तब आप उनकी फोटो ले सकते हो और वीडियो भी बना सकते हो । पर वे पैसे बहुत मांगते है सेा हम तो गये नही पर फोटोज में आप देख सकते हो कि कैसे नावे इकठठी करके उनसे आरती दिखाते हैं जब मै और लवी गये तो वहां पर गंगा महोत्सव चल रहा था और रोज शाम को कोई ना कोई नृत्य जैसे कथक आदि का डांस प्रोग्राम घाट पर बने एक विशेष जगह पर दिखाया जाता था । साथ ही घाट को बडे ही सुंदर तरीके से सजाया जाता था । गंगा स्नान के लिये दशाश्वमेघ घाट पर हम गये तो वहां साफ जल नही था । हांलाकि कुछ लोग फिर भी वहां पर नहा रहे थे पर हमारा मन नही किया और हमारे ही नही बहुत ज्यादा संख्या ऐसे लोगो की थी जो नाव में गंगा जी के पार जाकर साफ जल में नहाते हैं । हमने भी एक नाव पकडी जो हमें गंगा जी के पार ले गया और वहां जाकर हमने भी गंगा स्नान किया । यहां से काशी का और गंगा जी का दृश्य भी बहुत अच्छा दिखाई देता है । इसके कई फोटो जो हमने लिये उन्हे आप देखा सकते हो


इतिहास ईसा पूर्व की छटी शताब्दी में काशी भारत का बडा ही समृद्धशाली और महत्वपूर्ण राज्य था । मध्य युग में ये कन्नौज का हिस्सा था और बाद में बंगाल के पाल नरेशो का इस पर अधिकार हो गया था । 1194 में गौरी ने इस नगर में खूब लूट पाट की और विध्वंस किया । एक बार मुगल काल मे इसका नाम बदलकर मुहम्मदाबाद भी रखा गया । बाद में ये अवध दरबार के अधीन हो गया । 1950 में ये राज्य स्वेच्छा से भारतीय गणराज्य में शामिल हुआ । भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन में काशी हमेशा अग्रणी रहा और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रो का काफी योगदान रहा ।अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद , पंडित मदन मोहन मालवीय , लाल बहादुर शास्त्री , डा0 सम्पूर्णानंद आदि लोगो का इतिहास यहीं से जुडा है । गायन और वादन दोनो ही विधाओ का केन्द्र रहा है काशी । इसके अलावा यहां संस्कृत सीखने के लिये प्राचीन काल से दूर दूर से लोग आते रहे हैं । ठुमरी वाराणसी के संगीत की विशेष कला है । रसूलन बाई , काशी बाई , अनवरी बेगम और गिरिजा देवी प्रसिद्ध हैं जबकि तबला वादन में अनोखे लाल , कृष्णा महाराज शहनाई वादन व नृत्य में भी नंद लाल , उस्ताद बिस्मिल्ला खां और सितारा देवी आदि यहीं की प्रतिभा है । हिंदी की प्रतिभाओ में भारतेंदु हरिशचंद्र , हरिऔध, जयशंकर प्रसाद , प्रेमचंद और उर्दू में शेख अली हाजी , प्रो हफीज बनारसी , हक बनारसी और नजीर बनारसी का नाम प्रमुख् रूप से आता है


कला और उघोग काशी में यात्री हो या उघोगपति यहां के रेशमी और जरी के कपडो की ख्याति यहां आने से पहले ही सुन लेते हैं और जाते समय यहां की याद के रूप में अपने साथ लेकर जाते हैं । इसके अलावा यहां पीतल के बर्तनो पर सुंदर काम भी प्रसिद्ध है । लकडी के खिलौने भी यहां के प्रसिद्ध हैं ।


एक छोटी और अदभुत चीज का जिक्र मै जरूर करूंगा कि यहां एक राम नाम का कर्ज देने वाला बैंक भी है जिसका नाम राम रमापति बैंक है और ये वाराणसी के सबसे मशहूर घाट दशाश्वमेघ् इलाके में है 84 साल से चल रहे इस बैंक के कई लाख खातेदार हैं । एक ही परिवार की पांच पीढियो से चलता आ रहा ये बैंक में खाता खोले जाते हैं और लोन भी मिलता है पर पैसो का नही बल्कि राम नाम का । अगर मन में कोई मनोकामना है तेा बैंक में आवेदन पत्र भरिये और बैंक आपको सवा लाख राम नाम को लोन देता है आपको आठ महीने और 10 दिन के अंदर सवा लाख राम नाम लिखकर बैंक को वापस करना होता है । जिसके लिये बैंक आपकेा कागज ,स्याही और कलम देता है इस समय बैंक के पास 18 अरब 96 करोड 40 लाख हस्तलिखित राम नाम की निधि है जो भक्तो ने लिख कर वापस की है । है ना अजब हिंदु धर्म की गजब माया ? आप क्या कहोगे इसके बारे में मै कमेंट में इंतजार करूंगा


काशी में हो और काशी विश्वनाथ मंदिर ना जाओ तो आपका काशी जाना तो क्या कहीं भी घूमना व्यर्थ है । काशी विश्वनाथ का मंदिर 12 ज्योर्तिलिंगो में से एक है । पिछले हजारो वर्षो से हिंदुओ की आस्था का केंद्र ये मंदिर दुनिया भर के हिंदुओ को अपनी ओर आकर्षित करता है । और हिंदू धर्म में इसका एक विशिष्ठ स्थान है । ऐसा कहा जाता है कि एक बार गंगा जी में स्नान कर लेने और इस मंदिर के दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है । इस मंदिर की पौराणिकता और प्राचीनता इतनी है कि आदि शंकराचार्य , रामकृष्ण परमहंस ,स्वामी विवेकानंद , स्वामी दयानंद और गोस्वामी तुलसी दास जी भी इस मंदिर के दर्शन करने आये है तो हमें तो यहां जाना ही था और अपने इस तीन दिन के प्रवास में मै और लवी और दूसरी बार मै और मेरे एक मित्र जिनके साथ मै वाराणसी आया था , एक नही दो देा बार होकर आये । कभी बहुत भीडमिली तो कभी बिलकुल खाली पर पुलिस वालो की भीड कभी कम नही थी । मंदिर को अक्सर आतंक वादियो की धमकी मिलती रहती है और हमेशा यहां खतरा मंडराता रहता है सो पुलिस की कई टुकडिया यहां पडी रहती हैं और सुरक्षा व्यवस्था बहुत सख्त है ।


औरंगजेब ने 1669 में इस मंदिर को तुडवा दिया था और यहां ज्ञानवापी नामक सरोवर के स्थान पर एक मस्जिद बनवा दी थी । वर्तमान मंदिर का निर्माण महारानी अहिल्या बाई होल्कर द्धारा सन 1780 में करवाया गया था बाद में महाराजा रंजीत सिंह द्धारा 1853 में 1000 किलो शुद्ध सेाने से इसे मढवाया गया वाराणसी की प्रमुख धरोहरो में काशी हिंदु विश्वविदयाल या बनारस हिंदु यूनिवर्सिटी या बी एच यू एक प्रसिद्ध जगह है । और पूरी बात बताने से पहले मै आपको बता दूं कि जब आप कभी बनारस जाओगे या जा चुके हो तो आपको वहां के अलग हीचीज नजर आयेगी वहां के लोगो की और इस शहर की इतनी खासियते हैं कि क्या बताउं । सबसे पहली तो ये कि यहां के लोगेा की दो मुख्य पसंद हैं एक तो पान , हां जी आपको दूर से ही पता चल जायेगा कि यहां के लोग पान कितना पसंद करते हैं कि आपको मिलने वाले अमीर गरीब हर दूसरे या तीसरे शख्स के मुंह में पान होगा और वो भी मुहं भरा हुआ । हर नुक्कड पर एक दो नही कई कई दुकाने मिलेंगी चलती फिरती दुकाने अलग पान वालो की । दूसरा बडा शौक है चाय का और वो भी सबसे अलग । हर नुक्कड पर चाय की दुकान और चाय कितने की 3 रू की । मिटटी के छोटे से कुल्हड में बस दो घूंट भरने लायक क्योंकि जब दिन भर में कई बार चाय पियेागे तो ज्यादा तो पियोगे नही सो बस दो या तीन घूंट बिल्कुल मुम्बई की कटिंग चाय की तरह । और वो हमारे यहां की तरह चाय बनाते नही हर बार । एक बडे से भगोने में चाय बनी रहती है और गर्म होती रहती है या केतली में भरी रहती है । एक और खासियत है नामेा का अपभ्र्ंश करना । जब आप रेलवे स्टेशन से उतरते हो तो बिचू बिचू करते आटो वाले मिलेंगे । मै दो दिन बाद समझा कि ये बी एच यू को बिगाड कर बिच्चू कहने लगे हैं वैसे कुछ आटो वाले लंका लंका भी चिल्लाते मिलेंगे जो एक जगह है यही पर

वाराणसी जाने के लिये हमने जितनी भी बार गये दिल्ली से ट्रेन पकडी और रात को बैठकर सुबह वाराणसी पहुंच गये । वाराणसी का स्टेशन भी देखने लायक है अंदर से नही बल्कि बाहर से इसे एक हैरिटेज बिल्डिंग जैसा रूप दिया गया है । स्टेशन के सामने सडक पार करने के बाद आपको छोटे बडे होटल मिल जायेंगे जहां 200 रू से कमरा उपलब्ध् है । यहां आने के लिये ट्रेन की कोई कमी नही है बल्कि भरमार है आप देश् के किसी भी कोने से आओ । सडक मार्ग से भी यहां आना आसान है और हवाई मार्ग से भी . यहां आटो रिक्शा इतने हैं कि आपकेा पैदल चलना भी मुश्किल कर देंगे । जहां भी देखो हाथ देते ही आटो रिक्शा वाला मिल जायेगायहां के खाने की एक खास चीज मै आपको बता दूं कि मैने यहां मीठे समोसे देखे जी हां मीठे समोसे । हमने तो आजतक आलू भरे चटपटे समोसे ही खाये थे पर यहां तो उतने ही बडे समोसे को चाशनी में डाल कर खाया जाता है । मजा आ गया उन्हे खाकर । कभी जाओ तो जरूर खाना गंगा नदी के बारे में भी एक दिलचस्प तथ्य आपको बता दूं कि गौमुख से लेकर गंगासागर तक लगभग 2500 किमी0 की दूरी तय करने वाली गंगा उत्तर से दक्षिण की ओर बहती है लेकिन केवल वाराणसी में दक्षिण से उत्तर की ओर बहती है है ना दिलचस्प बात ?

COMMENTS

BLOGGER: 8
  1. jay shree krishna. Jay ho baba Vishvanath bholenath ji ki. Har Har Mhadev ji ki. Jay ho Ganag Maiyya ki.

    Manu ji Ye Varanasi vali post to bahut h iAchhi lagi. esa laga jese ki hamne bhi ganag snan aur baba vishvanath ji ke darshan kar liye ho.

    Aur ganga ji ke ghat par jo lighting thi vo to bahut hi sundar thi. Aur jo aapne ganag ji ke ghato ke photos click kiye vo bhi bahut hi sundar the.

    Manu ji aapne jo Ram Name ka Bank bataya uske bare me padhakr to me Surprised hu. kya baat he esa bhi bank hota he kya Jaha Raam Name Ka lone diya jata he.

    vese bahut hi Achha tha ye. Sahi he AAj ke Is Mahangai ke jamane me Rupyo ka Loan to Lena bahut hi Mushkil He. Lekin Raam Name Ka Loan Jo mil raha he Use Lene se nahi hukna chaiye.

    Ek Kahavat bhi he ki "Raam Naam ki Loot he Jitna Loot Sako loot lo". Is se to Raam Naam Lkhne ke karan Hame Punya hi Milta he. Veryyyyyyyyyyyyyy Niceeeeeeeeeee. Ye Bank to muje bahut hi pasand aaya.

    Iske Alava Manu jiVaranasi ke ganaga ghato aur ganag ji ke darshan karakar hame bhi Varanasi guma diya. Iske Liye AApka Bahut Bahut Dhanyawaad.

    Bhagvaan Bholenath ji Aur Shree krishna Isi Tarah Se AAp par kripa banaye rakhe Aur AApko hamesh Alag Alag yatra karne ka moka de.

    har har mahadev.

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  2. धन्‍यवाद तरूण जी आपके इस आभार के लिये

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  3. आपका यात्रा संस्मरण बहुत पसंद आया!

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  4. Tyagi sahab aapke sare vritant pade maine Man gadgad ho gaya samayaabav ki vajah se ghum phir nahi pata par Aapke dwara diye gaye jankari pakr main apne mata pita ko bhi ghuma phira dunga

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  5. Tyagi sahab aapke sare vritant pade maine Man gadgad ho gaya samayaabav ki vajah se ghum phir nahi pata par Aapke dwara diye gaye jankari pakr main apne mata pita ko bhi ghuma phira dunga

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  7. Varanasi, also known as Kashi and Banaras, is the cultural capital of India. Varanasi is a melting pot, where both death and life come together if you are looking cab services in varanasi then you have to take our taxi service

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TravelUFO । Musafir hoon yaaron: Varansi , Kashi, Banaras
Varansi , Kashi, Banaras
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