Pindari Kafni glacier trek 1

Kafni Glacier पिंडारी और कफनी ग्लेशियर की यात्रा को लिखते हुए मुझे बडा हर्ष हो रहा है क्योंकि ये वो यात्रा है जिसने मुझमें आत्मवि...


Kafni Glacier


पिंडारी और कफनी ग्लेशियर की यात्रा को लिखते हुए मुझे बडा हर्ष हो रहा है क्योंकि ये वो यात्रा है जिसने मुझमें आत्मविश्वास दोबारा भर दिया । एक साल से भी अधिक समय हो गया था कोई सीरियस ट्रैक किये हुए और इस बीच जो ट्रैक किये भी उसमें आत्मविश्वास डोल गया । केदारकांठा में बेस कैम्प तक पहुंचने के बाद समिट पर जाने के लिये मन ही नही किया । नाग टिब्बा में भी काफी थकान लगी तो लगने लगा कि शायद अब वजन ज्यादा बढ गया है इसलिये दिक्कत होने लगी है । पर असली कारण है कि मै घर पर बिलकुल भी पैदल नही चल पाता हूं , ना ही बस वगैरा से चलता हूं जो पैदल चलना पडे और साईकिल भी नही चला पाता हूं । इस समस्या का कोई समाधान भी नही निकल पा रहा था और मन मारकर यही सोचना पडा कि अब शायद ट्रैकिंग बंद करनी पडेगी ।

अमित तिवारी जी गुडगांव में रहते हैं और साल में 6 से भी ज्यादा ट्रैक कर लेते हैं । इधर तीन दिन या कोई वीकेंड की छुटटी मिली और निकल पडे । बस या ट्रैन से ही ​अक्सर करते हैं और इधर मै इतना आलसी हो चुका हूं कि बस तो छोडिये बाइक से भी नही जाना चाहता तो ऐसे में ट्रैक कैसे करूंगा । अमित भाई का संदेश आया कि पिंडारी ग्लेशियर चलना है तो मैने ऐसे ही हां लिख दिया । समय नजदीक आया तो किसी जिम्मेदारी की परेशानी ना देख चलने के लिये हां पक्की कर दी पर इस शर्त पर कि मै अपनी गाडी से चलूंगा और चार लोग और साथ जा सकते हैं । यदि इससे ज्यादा हुए तो दूसरा कोई इंतजाम कर लेंगें । अब पहले तो कई लोगो ने हां की थी पर जैसा कि अक्सर होता है तय समय पर केवल तीन ही लोग रह गये जिसमें मै , अमित तिवारी और शशि नेगी जी थे । ऐन चलने वाले दिन ही पता चला कि सूरज मिश्रा भदोही वाले भी हमें साथ देने आ रहे हैं और वो हल्द्धानी में हमें मिल जायेंगें । इसका मतलब था कि हम चार लोग होंगें और एक कार में इतने जने आराम से सफर कर सकते हैं ।

शशि नेगी जी मुख्य रूप से देहरादून में रहती हैं और शिक्षक हैं । पहाडन हैं तो नैसर्गिक ट्रैकर हैं और उनसे इस ट्रैक से पहले कभी मिलना वैसे तो नही हुआ था पर फेसबुक और व्हाटसएप पर काफी बाते होती थी इसलिये बिलकुल अंजान वाली बात नही थी । सूरज मिश्रा से भी दो साल के लगभग से फोन और अन्य माध्यम से बात होती थी और इस यात्रा पर जाने से पहले वो एक दिन नोयडा आये तो मुझसे मिलने घर आये । यहां मेरे घर पर नटवर लाल भार्गव भी आये हुए थे और हम तीनो ने काफी बढिया समय बिताया । मतलब कुल मिलाकर चारो जने एक दूसरे को काफी बढिया से जानते थे और इसलिये कोई परेशानी आने वाली बात नही थी हालांकि अभी तक मैने और अमित तिवारी ने एक और अमित तिवारी और सूरज मिश्रा ने एक ट्रैक साथ में किया था ।

जब ये कार्यक्रम बना था उसके कोई आठ या दस दिन पहले ही मुझे चोट लग गयी बाइक से । अचानक एक रिक्शा वाले ने हाथ दिये बिना ही रिक्शा मोड दिया और घर के नजदीक ही मेरी बाइक स्लिप हो गयी उसे बचाने के चक्कर में । बाकी तो मामूली खरौंच थी कंधे आदि पर लेकिन सीधे पैर की साइड में जो फुटरैस्ट होता है वो बाइक गिरने से मुडा और उसने टखने से थोडा उपर पैर में काफी बडा घाव बना दिया । घाव काफी गहरा था और रोज पटटी हो रही थी उस पर । पैर में दर्द भी काफी था । बाइक से चोट लगी तो गाडी से चलना शुरू किया और इस चोट के दो दिन बाद ही गाडी की भिडंत हो गयी । उस भिडंत में सामने की एक लाइट , आगे एक बम्फर और एक साइड का बम्फर क्षतिग्रस्त हो गया । अब घर वालो ने पंडित जी के पास अर्जी लगा दी कि देखना कोई ग्रह वगैरा तो खराब नही हैं जो ऐसी चोट और मुसीबते आ रही हैं । पंडित जी ने बता दिया कि बच गये हैं लेकिन बता देना कि अभी कुछ दिन समय ठीक नही है तो वाहन ना चलायें खासकर बाइक तो बिलकुल ना छुऐं एक महीने तक ।



साथी तीनो मित्रो में से किसी को गाडी चलानी नही आती थी और मेरे लिये गाडी से जाना मजबूरी है पहाड में क्योंकि मैक्स या बस में मुझे सिर घूमता है और इससे बचाव के लिये बस आंख बंद करके सोता ही रहता हूं । उल्टी भी हो जाती है जो कि नार्मली बिना पहाड के कहीं नही होती । मैडम की गाडी मैने भिडंत में ठोक दी थी तो मै उसे सही कराने गया बीमे के अंर्तगत तो वहां पर जाकर पता चला कि गाडी कम से कम 15 दिन में सही होेकर मिलेगी । मैने सोचा कि बंफर और लाइट को थोडा सा रिपेयर करा लेता हूं और आकर सही करा लूंगा तो मुझे बताया गया कि ​यदि आपने कुछ भी रिपेयर कराया तो क्लेम नही मिलेगा । अरे बाप रे

अब क्या किया जाये जबकि मैने वादा कर दिया है कि मै अपनी गाडी लेकर चलूंगा । ऐसे में मैने दूसरी गाडी को ले जाने का तय किया आल्टो 800 । इसे भी मै हर की दून , कुआरी पास और दो तीन जगह पहाडो में ले जा चुका हूं और यकीन मानिये आल्टो से बेहतर ड्राईविंग मै नही पाता पहाडो के लिये । इसकी काट यानि मोडो पर मोड काटने की क्षमता इतनी बेहतर है कि पूछिये मत । उपर से छोटी है और ग्राउंड क्लीयरेंस के मामले में बढिया है तो मुझे कोई दिक्कत पहले नही आयी । मै खराब से खराब रोड पर उसे ले गया और वो उछलती कूदती चली गयी । जब मै सैलेरियो को लेकर गया केदारकांठा तो पता चला कि धीरे चलानी है नही तो नीचे से लग जायेगी और ज्यादा लगी तो हो सकता है कहीं पर कोई ऐसा नुकसान हो जाये कि रात वहीं बितानी पडे और ट्रिप कैंसिल करना पडे ।

बस दिक्कत एक ही थी कि आल्टो चलाने की आदत लगभग छूट चुकी थी क्योंकि मैडम की गाडी ज्यादा भा रही थी अपनी के मुकाबले । फिर अब कोई आप्शन नही था सिवाय इसके कि आल्टो को ले जाया जाये । दूसरी परेशानी के लिये भौकाल मारने वाले सूरज मिश्रा का नाम आगे कर दिया कि गाडी मै नही सूरज चलायेगा तो घर वालो ने मरे से मन से हां कर दी । तीसरी थी पैर में चोट की बात तो उसके लिये एंटीबायोटिक खाने शुरू कर दिये क्योंकि पटटी होने के बाद भी चोट सही नही हो रही थी और दर्द भी काफी था । आल्टो के साथ एक दिक्कत और थी कि इसमें सीएनजी किट लगी थी कम्पनी फिटेड और उसके कारण डिग्गी में एक जोडी जूते रखने की भी जगह नही थी । चूंकि मुझे सिर्फ दो दिन पहले ही सैलेरियो को बीमे में सुधरवाने के लिये खडी करके आना पडा तो मै उस समय इस बात पर ध्यान नही दे पाया । बाद में सोचा कि 4 ब्रंदे जा रहे हैं तो एक की जो जगह बचेगी उसमें सबके बैग आ जायेंगें लेकिन ऐसा हुआ नही और जो हुआ वो बाद में बताउंगा ।

अमित भाई नेे इस ट्रैक को दोनो तरीके से सोचा था , एक अपना सारा सामान खुद लेकर जाने का तो टैंट और स्लीपिंग बैग हम लेकर चलेंगें और साथ ही खाने का सामान भी मैने लेकर रख लिया था । यदि हमें यात्रा के बेस कैम्प तक जाकर पता चले कि आगे होटल ​आदि की व्यवस्था हो जायेगी तो हम टैंट और ये सब सामान गाडी में छोड देंगे । यही तो अपनी गाडी का फायदा है । शशि नेगी जी देहरादून से नोयडा आ चुकी थी और वो भी हमें गाजियाबाद में मिलेंगी जहां अमित तिवारी जी भी गुडगांव से आ जायेंगें । यहां से हम तीनो चलेंगें रात को और सुबह हल्द्धानी में हमें सूरज मिश्रा मिल जायेंगें । सारा कार्यक्रम अमित तिवारी जी ने बनाया था और मैने बिलकुल दिमाग नही लगाया था ना ही मैने इस ट्रैक के बारे में मैने पढा कहीं कोई ब्लाग भी । मेरा इरादा बस इतना था कि जहां तक जा सकता हूं जाउंगा वरना वापस आ जाउंगा और यदि इस बार भी मुझे दिक्कत होती है तो इसके बाद ट्रैक तभी करूंगा जब पहले से प्रैक्टिस होगी वरना नही ।

शशि नेगी जी ने पहले ही बता दिया था कि वो सिर्फ पिंडारी तक ही जायेंगी और वहां से वापस हो जायेंगी क्योंकि उसके बाद उनकी छुटिटयां नही हैं और सूरज मिश्रा पहले एक बार पिछले साल नवम्बर में पिंडारी जा चुके थे । अमित तिवारी जी ने तय किया था कि वो पिंडारी और कफनी दोनो ग्लेश्यिर जायेंगें और इन्हे करने के बाद पंगुटाप और बजलिंग धार भी जायेंगें और उसके बाद भी हो सकता कि एवरेस्ट के लिये चल दें । 😆

तो पहला दिन हमारी यात्रा का ठीक ठाक था और रात के साढे नौ बजे मै अपने घर से चलकर गाजियाबाद बस अडडे पहुंच गया । साढे दस बजे अमित भाई और शशि नेगी जी दोनो मुझे वहां पर मिल गये और एक फार्मल सी बातचीत के बाद हम तुरंत गाडी में बैठकर चल दिये । ये समय बहुत बढिया होता है यात्रा के लिये क्योंकि इस समय ट्रैफिक ज्यादा नही होता तो शहर से निकलना आसान होता है । गाजियाबाद में बस अडडे के सामने के ठेके से एक हाफ रम का भी अमित तिवारी जी की स्पेशल फरमाइश पर ले लिया गया था कि कहीं सर्दी ज्यादा लगे तो दवाई के रूप में ले लेंगें । हालांकि फरमाईश तो बोतल की थी लेकिन मैने ही कम लिया क्योंकि उनके अलावा कोई पीने वाला नही था ।

सीएनजी की गाडी लेकर चलें हैं तो उसका फायदा उठाना बनता है इसलिये चलने के बाद मुरादाबाद से एक बार और सीएनजी भरवाई और इस गैस ने हमें हल्द्धानी तक पहुंचा दिया और उसके बाद भी आधी टंकी गैस बच गयी थी । मुरादाबाद से हल्द्धानी 130 किलोमीटर के लगभग है और गैस इससे दुगुना माइलेज दे देती है तो अब यहां से पैट्रौल पर चलेंगें और वापसी में हल्द्धानी से फिर से गैस पर मुरादाबाद तक पहुंच जायेंगें और वहां से फिर घर तक । घर से नैनीताल तक एक साइड मानकर चलिये 500 रूपये की गैस में पहुंच जायेंगें ।

मुरादाबाद में रात को रूक कर एक चाय की दुकान पर चाय के साथ घर से बनवाकर लाये हुए परांठे खाये और उसके बाद फटाफट चल पडे । बहुत ही बढिया समय रहा और मात्र 5 घंटे में हम काठगोदाम रेलवे स्टेशन पर थे जिसमें से गैस डलवाने और चाय पीने का समय भी शामिल था । सुबह साढे 3 बजे हम यहां पर आकर मिश्रा जी का इंतजार करने लगे । 

फोटो अभी कम हैं लेकिन बहुत आने वाले हैं और वो भी  बहुत बढिया वाले तो पढते रहिये 

मुरादाबाद में चाय पानी
काठगोदाम रेलवे स्टेशन पर
समय देख लीजिये

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