Nag tibba trek guide ,नाग टिब्बा ट्रैक के बारे में जानकारी

Nag tibba trek guide ,नाग टिब्बा ट्रैक के बारे में जानकारी nag tibba trekking सप्ताहांत ट्रैक weekend trek — नाग टिब्बा , (Nag tibba trek)का ट्रैक 2 दिन से अधिकतम 3 दिन में हो सकता है इसलिये ये आदर्श है दिल्ली वालो के लिये जिन्हे अक्सर सप्ताहांत पर ही घूमने को मिल पाता है । शुक्रवार की रात को चलकर शनिवार की सुबह तक पंतवारी और रविवार की दोपहर वापसी कर सकते हैं । एक बार देहरादून पहुंच गये तो काफी सवारी मिल जायेंगी । देहरादून तक रात के आठ नौ बजे तक पहुंचना कोई दिक्कत की बात नही है ।


Nag tibba trek guide ,नाग टिब्बा ट्रैक के बारे में जानकारी nag tibba trekking
सप्ताहांत ट्रैक weekend trek — नाग टिब्बा , (Nag tibba trek)का ट्रैक 2 दिन से अधिकतम 3 दिन में हो सकता है इसलिये ये आदर्श है दिल्ली वालो के लिये जिन्हे अक्सर सप्ताहांत पर ही घूमने को मिल पाता है । शुक्रवार की रात को चलकर शनिवार की सुबह तक पंतवारी और रविवार की दोपहर वापसी कर सकते हैं । एक बार देहरादून पहुंच गये तो काफी सवारी मिल जायेंगी । देहरादून तक रात के आठ नौ बजे तक पहुंचना कोई दिक्कत की बात नही है ।
उचित समय — nag tibba trekking के लिये बरसात के महीनो को छोडकर साल में किसी भी समय जा सकते हैं । बरसात में भी जा सकते हैं पर ट्रैक कई जगह से कच्चे रास्ते पर है तो बारिश के बाद फिसलने की ज्यादा संभावना है इसलिये बरसात में राय नही दूंगा । सितम्बर से लेकर जून में जब तक ​बारिश ना हो तब तक कभी भी जाईये ।
स्तर — नाग टिब्बा , (Nag tibba trek) ट्रैक को आसान समझा जाता है पर ये इतना भी आसान नही है । आप इसे आसान से मध्यम की श्रेणी में रख सकते हैं । अगर दो दिन का पूरा समय लेते हैं तो ये आराम से हो जायेगा ।  nag tibba trekking एक ही दिन में करने की कोशिश करना आपको थकावट या बेकार बना सकता है ।पहली बार ट्रैक करने वालो के लिये इसे करने की सलाह दी जाती है ।
सुरक्षा — नाग टिब्बा , (Nag tibba trek)  ट्रैक को काफी सुरक्षित माना जाता है । भूस्ख्लन की कोई घटना यहां नही हुई है । मसूरी , देहरादून से नजदीकी और कम समय में हो जाने के कारण भी यहां पर सुरक्षित किया जा सकता है । बहुत सारी कम्पनियो द्धारा ये ट्रैक कराये जाने के कारण पंतवारी रूट पर हमेशा लोग मिलते रहते हैं । जंगली पशुओ के मिलने की भी संभावना नगन्य है पर इसका मतलब ये नही कि आप अकेले रात के अंधेरे या सुबह सवेरे निकल लें । ऐसा करना गलत है इसलिये कुछ बाते अपने हाथ में ही होती हैं उन्हे अपने हाथ में ही रखेें ।
नाग टिब्बा जाने के रास्ते — नाग टिब्बा , (Nag tibba trek) जाने के कई रास्ते हैं ।
पंतवारी Pantwari — nag tibba trekking के लिये सबसे प्रसिद्ध और बढिया बना हुआ रास्ता पंतवारी गांव से है । मसूरी से पंतवारी गांव 50 किलोमीटर के लगभग है । देहरादून से मसूरी और मसूरी से कैम्पटी फाल आने के बाद यहां से यमुना पुल पार करके पुरोला रोड पर नैनबाग नाम के कस्बे तक आना है । नैनबाग में घुसने के बाद सबसे पहले जो रास्ता सीधे हाथ को आयेगा वो पंतवारी को जाता है । पंतवारी यहां से 16 किलोमीटर है । यहां से Nag tibba trek केवल 8 किलोमीटर है । पंतवारी से आगे भी गाडी जाती है जो कि कच्चा रास्ता है और दस किलोमीटर तक इस रास्ते पर जाने से  nag tibba trekking 2 किलोमीटर कम हो जाता है ।
देवलसारी Dewalsari— देवलसारी गांव से भी रास्ता जाता है । मसूरी से धनोल्टी रोड पर थत्यूड के रास्ते पर जाना है । इसमें सुवाखोली नाम की जगह आती है जहां से बांये मुड जाते हैं । थत्यूड से दस किलोमीटर आगे देवलसारी है । थत्यूड से थोडा आगे तक नैनबाग और देवलसारी के लिये एक ही सडक जाती है । एक पुल से बांये को नैनबाग रास्ता जाता है और दांये को देवलसारी । देवलसारी अन्तन गांव को भी कहते हैं । यहीं पर सडक खत्म हो जाती है और यहां पर रूकने के लिये वन विभाग वालो का रेस्ट हाउस है । उसे ही देवलसारी कहा जाता है ।
श्रीकोट गांव srikot — पंतवारी वाले रास्ते पर बढिया सडक से थोडा और आगे श्रीकोट गांव आता है । यहां से नागटिब्बा बेस कैम्प का रास्ता केवल 5 किलोमीटर है पर ये खडी चढाई है और पानी का नाला या स्थानीय भाषा में गदेरा कहे जाने वाले पानी के साथ साथ उपर चढता है । हमारे मित्र संदीप सिंह इसी रास्ते से आकर हमें बेस कैम्प पर मिले थे ।
उंचाई Height— 3020 मीटर नागटिब्बा की चोटी की और बेस कैम्प और नाग देवता मंदिर 2600 मीटर की उंचाई पर है । पंतवारी की उंचाई 1350 मीटर और गाडी दस किलोमीटर आगे ले जाकर जहां पर खडी की जाती है वहां की उंचाई 1700 मीटर के लगभग है ।
ट्रैक में लगने वाला समय time for nag tibba trek— दिल्ली से अगर रात को चला जाये तो देहरादून या मसूरी अल सुबह पहुंचा जा सकता है और नौ से दस बजे सुबह तक बस या टैक्सी से पंतवारी । उसी दिन nag tibba trekking दिन के 12 बजे भी शुरू करें तो शाम 4 से 5 तक बेस कैम्प पहुंच सकते हैं । अगले दिन सुबह 7 बजे आराम से चलें तो दस बजे तक Nag tibba नाग टिब्बा तक जाकर और मस्ती करके 10 बजे तक बेस कैम्प और 2 बजे तक पंतवारी वापस आ सकते हैं । शाम तक देहरादून पहुंचकर वहां से दिल्ली के लिये बस या ट्रेन पकडी जा सकती है । कुल जमा दो दिन और तीन रात में ये ट्रैक कर सकते हैं ।
सबसे जरूरी बात —Nag tibba trek ट्रैक पर सबसे जरूरी याद रखने लायक बात बस यही है कि यहां पर पानी की कमी है । पानी पंतवारी से शुरू करने पर गोट विलेज तक तीन चार बार मिलता है उससे आप अपनी बोतल भर सकते हैं । इसके बाद पानी Nag tibba बेस कैम्प पर नाग देवता के मंदिर के पास बने कुंड में ही मिलता है जो​ कि हाईजेनिक बंदो को हो सकता है पसंद ना आये । इस पानी को पीने के दो तरीके हैं या तो आपके पास छोटा वाला फिल्टर हो या फिर आपके पास खाना बनाने का साधन जैसे गैस या स्टोव हो तो उस पर पानी को उबालकर पी सकते हैं । फिर भी नीचे पंतवारी से पानी लेकर चलना श्रेष्ठ है । पानी और इसकी मात्रा का वजन उठाने से परहेज हो तो खच्चर किया जा सकता है जो कि पानी के साथ साथ आपका सामान भी मजे से ले जायेगा और इस बहाने आप पहाड में किसी को रोजगार भी दे सकेंगें
पैकेज की जानकारी — नाग टिब्बा , (Nagtibba trekking ) कराने के लिये बहुत सारी कंपनियां हैं । ज्यादातर कंपनियां इस ट्रैक के लिये देहरादून से देहरादून तक का 3600 रूपये लेती हैं जिस पर टैक्स आदि मिलाकर ये 4000 प्रति व्यक्ति के लगभग बैठता है यदि आप देहरादून से पंतवारी तक खुद पहुंच जाते हैं तो फिर आपको पंतवारी गांव में 2500 रूपये तक  में पैकेज मिल जायेगा । हमने गांव में कई दुकान पर बात की तो उन्होने बताया कि ग्रुप यदि बडा हो तो हम Nagtibba trek  2000 रूपये प्रति व्यक्ति भी उपलब्ध करा देते हैं । इसमें गांव के लोग भी वही सब चीजे देते हैं जो कि नेट पर काम करने वाली कम्पनियां ।
शराब पीने वालो से विनती — अक्सर लोग यहां पर अपना वीकेंड मनाने आते हैं और उनमें काफी संख्या युवाओ की होती है । इन युवाओ के कारनामें यहां पर फूटी बोतलो से दिखायी देते हैं । नाग टिब्बा , (Nagtibba trek) और नाग देवता के मंदिर को यहां इस पूरे क्षेत्र में लोग बहुत पवित्र मानते हैं और यहां पर शराब पीने वाले को अच्छा नही मानते । अच्छा होगा कि यदि आपको शराब पीनी ही है तो आप नाग देवता मंदिर और उसके पास वाले बुग्याल पर अपना कैम्प ना लगाकर दूसरी तरफ लगायें ।
बेस कैम्प — बेस कैम्प पर फारेस्ट वालो की एक बिल्डिंग बनी है जिसमें दो या तीन कमरे हैं । इनमें से एक कमरा तो घोडे खच्चर वालो के लिये आरक्षित है और दूसरे में यहां पर कैम्प लगाने वाले गांव वाले खाना बनाने और अपने सोने के काम में लेते हैं । इस बिल्डिंग को अपने सोने के लिये इस्तेमाल आप तभी कर सकते हैं जब यहां पर भारी भीड ना हो तो आपका काम स्लीपिंग बैग से ही चल जायेगा पर ऐसा आपको कहीं से भी पता चलना संभव नही है इसलिये अपना टैंट साथ लेकर चलें तो ही ठीक है ।
कैम्पिंग के सामान — पंतवारी गांव में किसी चीज की कमी नही है । यदि आपके पास अपना टैंट और स्लीपिंग बैग् आदि सब सामान है तो ही लेकर जाना ठीक है अन्यथा दिल्ली से लेकर जाने की बजाय आप पंतवारी से लें तो ज्यादा बेहतर रहेगा । दिल्ली से किराये पर लेने में दो दिन वैसे ही जुड जाते हैं किराये के तो बात वही बैठेगी । आप पंतवारी में चौहान की दुकान पर सम्पर्क कर सकते हैं और उसके अलावा भी गांव में कई लोग ये सुविधा देने वाले हैं । पंतवारी गांव में हमें चौहान वाले ने 4 वाले टैंट का 500 रूपये किराया और स्लीपिंग बैग का 100 रूपये बताया था । खच्चर वाले 600 रूपये प्रति रोज लेते हैं । यदि आप चढने में भी उनकी मदद लेते हैं तो भी बढिया है । चार आदमी के लिये 150 रूपये में सामान जाने से आप आराम से चढ सकते हैं ।
नाग टिब्बा , (Nagtibba trek) पर क्या कर सकते हैं — नाग टिब्बा , (Nagtibba trek) ट्रैक पर बेस कैम्प पर शाम को सूर्यास्त बहुत बढिया दिखायी देता है । इसके लिये आपको चोटी पर जाने वाले रास्ते पर उपर चढना होगा दस बीस मीटर बेस कैम्प से । सूर्योदय देखने का मजा नाग टिब्बा की , (Nagtibba trek) चोटी पर है अगर आप सुबह वहां पर पहुंच सकें तो । एक घंटे का रास्ता है और धार धार चढना है जिसमें कि रास्ता बना हुआ है तो भटकने की गुंजाइश नही है । फिर भी अकेले या दो तीन हों तो किसी के साथ चलना ज्यादा बेहतर है ।
मौसम — नाग टिब्बा , (Nagtibba trek)  पर फरवरी के महीने में बहुत ठंडा मौसम था । आप समझ सकते हैं कि मसूरी केवल 2000 मीटर के आसपास है जबकि बेस कैम्प नाग टिब्बा , (Nagtibba trekking) का 2600 इसलिये यहां पर ठंडक तो मिलनी तय है । दिसम्बर से मार्च या अप्रैल तक स्लीपिंग बैग होेने के बाद भी गर्म इनर ले जाना बढिया रहता है ।
रास्ता Nag tibba trek route — पंतवारी से जब आप चलेंगें तो आपको दो किलोमीटर तक कई बार गाडी वाला रास्ता मिलेगा कम से कम चार बार । जहां पर गाडी लास्ट जाती है वहां पर पानी का स्थान बना है उससे उपर चलेंगें तो गोट विलेज के बोर्ड सफेद रंग के मिलते जायेंगें हर आधे किलोमीटर पर । कई जगह रास्ते दो अलग अगल हो जायेंगें पर जाकर मिलेंगें एक ही जगह । गोट विलेज तक दांये हाथ को उपर की ओर चलना है नीचे नही उतरना है । चलते हुए रास्ते पर खच्चरो की लीद और पैरो के निशान खूब मिलते हैं । गोट विलेज पर आपको फिर से पानी का स्थान मिलता है और सामने धार दिखती है जिसमें घना जंगल है । यहां पर भी दो रास्ते कई जगह होते हैं पर दोनो एक ही जगह जाकर मिल जाते हैं । एक रास्ता हमेंशा आपको चौडा वाला मिलेगा जबकि एक छोटी पगडंडी । चौडा वाला रास्ता आसान है पर लम्बा है जबकि छोटी पगडंडी शार्ट पडेगी । कहीं भी नीचे नही उतरना है और दांये हाथ को ही रहना है । दो बार बुग्याल मिलेंगें और उसके बाद तीसरे बुग्याल को पार करते ही बेस कैम्प दिखायी दे जायेगा । बेस कैम्प से चोटी का रास्ता सीधे सामने दिखायी देता है और रास्ता अच्छी तरह पहचान में आता है । यहां भी अनेको शार्टकट हैं लेकिन आपको चोटी की दिशा में ध्यान रखना है और आप भटकेंगें नही ।
अन्य तैयारी — नाग टिब्बा ट्रैक , (Nagtibba trekking) के लिये विशेष तैयारी करने की जरूरत नही है कि आप स्पेशल ट्रैकिंग शूज या ​कपडे खरीदें । जूते बस ऐसे हों जिनका तला सपाट ना हो । साथ में ट्रैकिंग स्टिक रखें ना हो तो डंडे काफी मिल जाते हैं जंगल से । बर्फ वाले दिनो में चश्मा जरूरी है । जरूरी दवाईयां हमेशा हर ट्रैक पर होनी ही चाहियें जिसमें दस्त , सिरदर्द , बुखार , शरीर में दर्द ,चोट के लिये , मोच के लिये , गैस आदि बनने के लिये जरूरी हैं ।
आपको ये Nag tibba trek guide पोस्ट कैसी लगी इसके बारे में जरूर बताईयेगा । कोई और जानकारी जो मै nag tibba trekking की इस पोस्ट में नही लिख पाया हूं उसके बारे में बताईये मै जरूर शामिल करूंगा । कोई गलती या कमी हो तो उसे भी बताईये ताकि सुधार लाया जा सके ।

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TravelUFO । Musafir hoon yaaron: Nag tibba trek guide ,नाग टिब्बा ट्रैक के बारे में जानकारी
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Nag tibba trek guide ,नाग टिब्बा ट्रैक के बारे में जानकारी nag tibba trekking सप्ताहांत ट्रैक weekend trek — नाग टिब्बा , (Nag tibba trek)का ट्रैक 2 दिन से अधिकतम 3 दिन में हो सकता है इसलिये ये आदर्श है दिल्ली वालो के लिये जिन्हे अक्सर सप्ताहांत पर ही घूमने को मिल पाता है । शुक्रवार की रात को चलकर शनिवार की सुबह तक पंतवारी और रविवार की दोपहर वापसी कर सकते हैं । एक बार देहरादून पहुंच गये तो काफी सवारी मिल जायेंगी । देहरादून तक रात के आठ नौ बजे तक पहुंचना कोई दिक्कत की बात नही है ।
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