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Bhavishya badri मुझे लगा कि नहर कुछ बडी होगी पर ये खेतो में पानी देने वाली पक्की नाली को नह...


Bhavishya badri
मुझे लगा कि नहर कुछ बडी होगी पर ये खेतो में पानी देने वाली पक्की नाली को नहर बोल रहे थे । करन ने उनकी बात नही सुनी और खडी धार पर चढना शुरू कर दिया । आगेे जाकर झाडी आने लगी और कपडे भी उसमें उलझने लगे । मैने करन को आवाज देकर कहा कि ये रास्ता नही हो सकता । वो उतरकर आया और उसके बाद नीचे नहर के किनारे जाकर एक भैंस चराते छोटे लडके के पास गया । मै अपनी जगह पर ही खडा था । करन ने इशारा किया कि इधर से आ जाओ तो मै उसके पास पहुंचा तब उसने बताया कि लडका कह रहा है कि सामने जो चीड के दिख रहे हैं वो लाल बाबा का आश्रम है और उससे आगे भविष्य बद्री है जिसका रास्ता लाल बाबा ही बता देंगें ।

अभी तो दिमाग का दही हो गया था कि चढाई इतनी चढने के बाद भी अभी मंदिर काफी दूर दिख रहा था और उल्टे हाथ की साइड में नीति घाटी दिख रही थी जो कि मौसम खराब होने के कारण अब धुंधली होती जा रही थी । ऐसा लग रहा था कि जब तक हम मंदिर पहुंचेंगे तब तक बारिश आ सकती है । उपर से ये चढाई चढने के बाद भी मंदिर के लिये और चलना पडेगा ये सोचकर भी दिमाग खराब हुआ जा रहा था । दिन के एक बजे हमने चढना शुरू किया था और इतनी मेहनत करने के बाद भी आज यहां पर ही रूकना पडा तो मुझे खर्च बढ जायेगा । इस यात्रा में मै अकेला आया था वो भी गाडी लेकर तो 3000 रूपये तो मुझे पैट्रौल का खर्च ही था और 2000 मुझे करन को देने थे कम से कम । मै सोच रहा था कि आज ही वापस चल पडते तो ठीक था ।

यहां नहर के रास्ते रास्ते हम चल पडे और थोडी दूर जाकर पानी की धारा मिली । जिस नहर से हम आये वहां पानी नही था क्योकि नहर को बीच से तोडकर पानी सुबाई गांव में ले जाया गया था सीधे । पानी के बराबर से ही रास्ता जा रहा था और थोडी दूर चलकर ही एक आश्रम आया जिसपर लाल बाबा का आश्रम लिखा हुआ था । वहीं पर एक सन्यासी महाराज भी बैठे थे । यहां पर आश्रम काफी बडा बना हुआ था और बहुत सारे कमरे भी थे । एक औरत अपने बच्चे के साथ बैठी ​थी जिससे करन ने पूछा तो उसने उपर की ओर इशारा कर दिया । अब करन ने सीधे नाक की सीध का रास्ता पकड लिया । वो इस काम में पक्का था और जैसा कि मैने आपको बताया कि इस समय मुझे चढने में पैरो में इतनी तकलीफ नही हो रही ​थी जितनी सुबह उतरने में थी क्योंकि लगातार चढाई या लगातार उतराई में ​ही दिक्कत होती है । एकमात्र आराम हमने दस मिनट का लाल बाबा के आश्रम से आगे किया जहां पर मैने पानी पिया और उसके बाद करन को बोल दिया कि अब हम भविष्य बद्री में ही रूकेंगें ।

यहां से आधा किलोमीटर पर कुछ चीड के पेड जो कि हमें सुबाई गांव की धार से मुडते ही दिखे थे, अब वो पास आते जा रहे थे । करन मुझसे पहले पहुंच गया और झूमता सा दिखा । यहां पर कई कमरे थे और करन मुझसे बोला कि हम पहुंच गये ये ही भविष्य बद्री है । मैने पूछा कि किसने बताया तो उसने एक महाराज की तरफ इशारा किया । महाराज फोन पर लगे हुए थे । मैने अपना बैग उतार दिया और राहत की सांस ली । एक कमरा सामने धूनी का दिख रहा था जबकि दूसरा कमरा और उसके पास टायलेट बाथरूम थे । महाराज फोन से फारिग हुए तो मैने उनसे पूछा तो उन्होने बताया कि यही है भविष्य बद्री जाओ दर्शन कर लो । पीछे एक कमरे में गया तो वहां पर साधु महाराज की मूर्ति लगी थी जिसे महाराज ने अपना गुरू बताया । मेरा दिमाग खटक गया । महाराज भविष्य बद्री कहां है ये बताओ । महाराज ने कहा कि ये काली मठ है और भविष्य बद्री यहीं पास में ही है जहां मै आपको लेकर चलूंगा । वो बच्चा सही कह रहा था कि भविष्य बद्री आगे है वहां से महाराज हमें लेकर चले कालीमठ से आगे तो जरा सा आगे उल्टे हाथ पर बढिया बिल्डिंग बनी थी और सीधे हाथ पर दो और बिल्डिंग । महाराज ने बताया कि उल्टे हाथ वाली बिल्डिंग सतपाल महाराज का आश्रम है और उससे आगे वाली दो में से एक ग्राम पंचायत का भवन है जब​कि दूसरा गेस्ट हाउस है । गेस्ट हाउस ठेकेदार ने बनाकर दे दिया है पर अभी उसमें पानी की लाइन शुरू नही हुई है और ना ही वो अभी चालू है । उसका कमरा कौन देगा जब वहां पर कोई है ही नही । महाराज ने बताया कि यहां मंदिर में भी कोई पुजारी नही है ।

ये सुनकर मै हैरान रह गया क्योंकि भविष्य बद्री तो पंच बद्री में से एक है पर वहां पर कोई नही था । गेस्ट हाउस से जाकर ही मंदिर दिखता है वरना नही दिखता क्योकि ये ऐसी लोकेशन पर है कि पहाड और जंगल के बीच इसे सीधे कहीं से देखा नही जा सकता । कालीमठ यानि महाराज के आश्रम से दो सौ मीटर और बस । महाराज ने हमें मंदिर में ले जाकर वहां पर दर्शन कराये आराम से । हमने मंदिर की बजाय महाराज को ही दक्षिणा दे दी । यहां पर भी पानी आदि की व्यवस्था थी और टैंट लगाया जा सकता था मंदिर प्रांगण और उसके आस पास । जगह तो ऐसी कि मन करे कि यहीं पर रम जाओ बस । मुझे तो बहुत पसंद आयी मंदिर की जगह भी और उसके अलावा महाराज का आश्रम भी ।

महाराज को फोन पर बाते करते सुना तो उन्होने अपना परिचय त्यागी जी महाराज के नाम से दे रहे थे । मैने अब वापिस आते हुऐ उनसे पूछा कि आप त्यागी हो तो उन्होने बताया कि मै त्यागी जाति से नही पर मेरे गुरूजी ने मेरा नाम त्यागी रखा था । महाराज से बातचीत में पता चला कि नीचे सुबाई गांव वाले इस इलाके में कीडाजडी काफी ढूंढते हैं और पाते भी हैं तो एक महीने या दो महीने में एक किलो भी पा गया तो बंदा आठ से दस लाख कमा लेता है । ऐसे में पैसो की जरूरत नही तो यहां पर कोई आसानी से जमीन बेचता नही । सुबाई गांव में हमने भी देखा कि पूरे गांव में पक्के लैंटर के मकान है जो कि इतने दूरदराज में मैने कम ही देखे हैं ।

उधर धम्म् से आवाज होती बिजली की गरज की तो ऐसा लगता कि बारिश होने वाली है । महाराज ने बताया कि ये ब्लास्टिंग है और इसका असर उन्होने अपने आश्रम की दीवारो पर दिखाया जिनमें कमरो में दरार तक आ गयी थी । विकास के नाम पर जो उत्तराखंड में हो रहा है वो विनाश कर रहा है हम वा​पस महाराज के आश्रम आ गये । महाराज ने हमें खाने का आफर दिया पर हमने मना कर दिया । मैने आज सुबह से खाना नही खाया था बस मैगी ही खायी थी । दोपहर में कोल्ड ड्रिंक पी थी इसके अलावा पानी पीकर ही काम चला रहा था । जब मेरे मन में कोई लक्ष्य होता है तो मुझे भूख प्सास का ध्यान नही रहता ये आदत मेरी घुमक्कडी में ही नही बल्कि जीवन में भी है । मै व्रत रख नही पाता कभी और किसी काम में लगा होउं तो मुझे भूख का पता ही नही चलता । अब हम भविष्य बद्री के दर्शन कर चुके थे और एक बजे के चले हम पोने चार बजे यहां पर पहुंच गये थे । रास्ते में एक जगह के अलावा मै कहीं नही बैठा । एक घंटे में दो किलोमीटर का एवरेज निकला था जो कि ठीक ही था । भूख ने सताया तो मैने करन से वो परांठे निकालने को कहा । महाराज ने फिर से कहा कि खाना रखा है बस गर्म करना है पर मैने मना कर दिया । महाराज ने चाय को कहा तो मै मना नही कर पाया । महाराज गये और चाय ले आये । मै अवाक कि महाराज इतनी जल्दी चाय क्या बनी रखी थी ये भी तो बोले कि नही बनाकर लाया हूं अभी ।

महाराज ने कहा कि बेकार पडे चीड के फूल या लकडी बहुत ज्वलनशील होेती है और तेजी से काम करती हैमैने चाय के साथ परांठे खाये तो मन भी तृप्त हो गया । करन ने भी एक परांठा ले लिया था और महाराज के साथ बात में पता चला कि वहां पर तीन साल में इक्का दुक्का ही लोग आये हैं जबकि आपदा से पहले यहां पर काफी लोग आते थे । इसके अलावा इस बार यहां पर पहली बार उन्होने बर्फ नाम मात्र को देखी । महाराज यहां सर्दियो में एकांतवास करते हैं और यहीं रहते हैं । दस बीस या थोडे उससे ज्यादा भी लोग हों तो महाराज के पास रह सकते हैं इतनी व्यवस्था उन्होने कर रखी है । हमने महाराज का नम्बर लिया और मैने मोबाईल में आश्रम की उंचाई देखी जो कि 2850 मीटर बता रहा था । भविष्य बद्री यहां से दस बीस मीटर नीचे होगा बस । महाराज को चाय के पैसे तो देना अशोभनीयता होती जो मैने हल्दीराम की नमकीन का और कुछ बिस्कुट के बडे पैकेट महाराज को दे दिये । मेरे जैसे भाईयो के या उनके काम आयेंगें । महाराज ने बताया कि पानी की लाइन या बिजली उन्होने सब अपने खर्च से ही यहां पर लाये हैं । महाराज ने हमें परिवार सहित आने का भी निमंत्रण दिया जिसे मै अपने मन में हमेशा रखूंगा ।

पोने पांच बजे यानि ठीक एक घंटे में हम वापस चल दिये और मैने उतरने में भी कोई रेस्ट नही लिया तब भी दो घंटे में हम रिंगी गांव तक पहुंचे । मेरी चाल उतरने में चढने जैसी ही थी क्योंकि उतरने में दर्द होना लाजिमी था पर पहले काफी चढाई करने से पैरो को आराम मिला था जिसने शुरू के दो तीन किलोमीटर आराम से उतरवा दिये पर उसके बाद तो पैर खिचडने शुरू हो गये थे । अब आज रात को तो निकलना संभव नही था तो आज जोशीमठ रूकना था पर पैरो की और शरीर की थकान दूर करने का इससे बढिया तरीका क्या हो सकता था कि हम रिंगी गांव से अपनी गाडी लेकर फिर से गंधक के झरने पर जायें और वहां पर गरम पानी से नहाकर थकान दूर कर लें । रिंगी गांव में पहुूंचने तक अंधेरा होने लगा था और गाडी को नीचे तपोवन तक लाने तक लाइटे जल गयी थी

अगली पोस्ट में जोशीमठ से घर तक का सफर कुछ नये रास्तो और मंजिलो के साथ /div>

Kuari pass-




कालीमठ आश्रम
त्यागी जी महाराज करन सिंह के साथ
आश्रम से आगे इन पेडो के बीच है भविष्य बद्री
मौसम डरा रहा है
सतपाल महाराज का आश्रम
पहला ग्राम पंचायत भवन दूसरा गेस्ट हाउस
कालीमठ आश्रम में त्यागी जी महाराज के गुरूजी का कमरा
दूसरा कमरा पूजा और धूनी का
त्यागी जी महाराज भविष्य बद्री के गेट पर पीछे ही मुख्य मंदिर है गेट के जो दिख भी रहा है
भविष्य बद्री दर्शन
भविष्य बद्री दर्शन
वापसी में चिडिया रानी मिली
लाल बाबा आश्रम
नहर के किनारे किनारे
पडौस के गांव में मुंडन संस्कार था
रिंगी गांव का स्कूल
करन चलने के लिये तैयार

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