Mount Abu ,रेगिस्तान में नखलिस्तान

सुबह के लिये पहले ही तय हो गया था कि 3 बजे उठकर और 4 बज तक तैयार होकर चल पडेंगे ताकि 4 घंटे ...


सुबह के लिये पहले ही तय हो गया था कि 3 बजे उठकर और 4 बज तक तैयार होकर चल पडेंगे ताकि 4 घंटे में माउंट आबू पहुंच जायें और इसीलिये सब अपने टाइम से तैयार हो गये । कल्लू महाराज ने भी गाडी तैयार कर रखी थी सेा अपना सामान रखा और ठीक 4 बजे हम निकल लिये । उस वक्त अंधेरा था और हमें एक दो जगह माउंट आबू जाने वाले रास्ते के बारे में पूछना पडा क्योंकि दिन के समय तो बहुत लोग मिल जाते हैं पर जब हम जा रहे थे तो ज्यादातर केवल वे ही लोग मिलते हैं जिन्हे खुले में शौच की आदत होती है खैर पूछत पाछते हम एक बढिया और नये से हाइवे पर चढ गये ।
पहाडियेा का नजारा
उस समय हमने इतने लम्बे टूर को बनाने में बहुत मेहनत की थी पर वो नेट से केवल घूमने की जगहो के बारे में जानकारी इकठठा करने तक ही थी । ये राष्ट्रीय राजमार्ग था और नया नया बना था । ट्रेफिक नाम को भी नही था कोई वाहन बहुत दूर जाकर मिलता था और वो भी केवल ट्रक । हम थोडे सशंकित थे तभी एक जगह पुलिस जिप्सी खडी दिखाई दी उन्होने हमें हाथ देकर रूकने का इशारा किया । हमने गाडी रोकी तो उन्होने पहले तो हमसे कुछ सामान्य बाते पूछी कहां से आये हो कहां जाना है । फिर बोले अभी थोडी देर रूक जाओ ।
प्वांइट से प्लेन का नजारा
एक दूसरा नजारा
हमने पूछा क्यों तो बोले कि ये हाइवे अभी नया बना है और जिन पहाडो को काटकर ये बनाया गया है यहां कुछ आदिवासी जातियां रहती हैं जिनमें से कुछ लोग अंधेरे में वाहनो को पत्थर मारकर गाडी रूकवा लेते हैं और लूटपाट करते हैं । और ऐसा ज्यादातर छोटे वाहनेा की साथ होता है क्योंकि बडे वाहनो जैसे ट्रक आदि पर पत्थर ज्यादा असर नही करते । हमने उनसे पूछा कि आप कुछ क्यों नही करते तो उन्होने बताया कि ऐसा रोज नही होता और इतने लम्बे हाइवे पर गश्त कितना भी करो ये लोग अपना काम करके भाग जाते हैं इसका एक और कारण अभी इस रास्ते का नया बनना और कम ट्रैफिक होना भी है उजाला होने पर ऐसी कोई समस्या नही है । हमने पुलिस वालो की बातो पर अमल किया और लगभग एक घंटे तक वहीं खडे रहे । महिलाये गाडी में सो रही थी और हम बाते कर रहे थे ।
मेंढक जैसी आकृति का पत्थर
एक फोटो हम दोनो का हालांकि धूप सामने की है
लगभग साढे पांच बजे उजाला होना शुरू हुआ और दो तीन गाडिया और रोक ली थी तब तक पुलिस वालो ने तब उनके साथ हमें रवाना किया । अगर हमें इस बात का पता होता तो हम इतनी सुबह चलते ही नही । पर कोई बात नही उसके बाद हमने उजाले में उस हाइवे को देखा कि वहां जो रास्ते में गांव आये उनमें से ज्यादातर में पक्के घर नही थे घास फूस की झौंपडिया थी । यानि की ज्यादातर लोग आदिवासी और गरीब थे खैर रास्ता बहुत बढिया था और गाडी 80 की स्पीड से नीचे नही आयी । काफी लंबा सफर काफी जल्दी तय हो गया और हम आबू रोड पहुंचे जहां से पहाडो का सफर शुरू हुआ और अब तक पहाडो का सफर नही किया था इस सफर में और मै पीछे बैठा था सो मेरे सर में चक्कर आने शुरू हो गये । तब मैने गाडी रूकवाई और लालाजी को पीछे भेजा । एक घंटे में हम आबू पर्वत पहुंच गये
पीस पार्क का नजारा
फूलो का गलियारा
राजस्थान का कश्मीर है माउंट आबू । वैसे जो हमने देखा उस माउंट आबू के पहाड तो सूखे से थे पर शहर में जाकर देखा तो काफी हरियाली थी । शहर में घुसने से पहले नगर टैक्स देना पडता है । जिनकी अपनी गाडी हो उन्हे तो ये अलग खर्च है पर जो बस से जा रहे हों उनके लिये नही । बताते हैं कि ऋषि वशिष्ठ ने यहां पर यज्ञ आयोजित किया था । हमने यहां गाडी की पर्ची कटने की जगह पर ही कई गाइड पकड लिये जो कि जब तक ड्राइवर पर्ची कटाकर लाता तब तक गाडी वालो को घूमने की जगह और अपने चार्ज बता रहे थे । हमने भी काफी सौदेबाजी करके 200 रू में एक गाइड कर लिया जो हमारे साथ गाडी में ही बैठ गया आगे की सीट पर और हमें रास्ता बताता हुआ चलने लगा ।
फूलो का सुंदर दृश्य
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माउंट आबू में रेगिस्तान में घनी हरियाली
बडे से ओम के नीचे हम सब
ये भी एक सुंदर मूर्ति है
एक गलियार हरियाली का
उस गाइड को लेने का फायदा ये हुआ कि जो जो प्वाइंट उसने हमें बताये थे उस पर हमें किसी से भी रास्ता पूछना नही पडा । वो गाइड हमें सबसे पहले ले गया एक प्वाइंट पर जिसका नाम था सनसेट प्वांइट । सुबह सुबह का टाइम और ले गया सनसेट प्वांइट । यहां से मैदानी इलाको का नजारा बडा अच्छा दिखाई दे रहा था यहां पर हमने दो तीन फोटो खिंचाई और उसके बाद गाइड से पूछा कि भार्इ् अब कहां चलना है तो उसने बोला कि उपर की ओर देखो ये टाड राक है । हमने देखा तो ये एक ऐसा पत्थर था कि जिसे देखने पर लग रहा था कि कोई मेंढक कूदने को तैयार बैठा हो । यही पर कुछ सीढिया थी जिससे नीचे का नजारा दिखाई देता था उसे उस गाइड ने बताया सुसाइड प्वांइट या लवर प्वांइट क्योंकि यहां से कूदकर किसी जोडे ने सुसाइड कर ली थी तो इसलिये इसका नाम सुसाइड प्वांइट पड गया । क्या यार जहां देखो ये ही प्वाइंट और हमारे हिंदुस्तान में प्रेम इतना गहरा और व्यापक है कि अपने प्यार को अमर बनाने के लिये जहां भी साथ में घूमने जाते हैं वहीं पर ऐतिहासिक इमारतो और यहां तक की पत्थरो पर भी अपना अपना नाम लिख देते हैं ताकि और जो भी पर्यटक आगे आयें तो उनका नाम पढें । तो गाइड महाराज ने जो हमें आठ दस जगहो की लिस्ट दिखाई थी उसमें से तीन को तो यहीं पूरा कर दिया एक जगह खडे होकर ही और एक और उपर को जाते हुए रास्ते को देखकर बताया कि यहां से रास्ता जाता है कुछ सीढिया चढकर एक मंदिर के लिये आप जाना चाहो और देखकर आना चाहो तो देख आओ । कितनी सीढिया ? बोला होंगी सौ से कुछ उपर । बस देख लिया चौथा प्वांइट अब आगे क्या दिखाओगे भाई तो गाडी में बैठकर वापिस चल पडे और नक्की झील पर पहुंचे । माउंट आबू की खूबसूरती में चार चांद यही झील लगाती है और इसे नैनीताल की तरह बना देती है ।
ये रास्ते ​हरियाली के
। इसी से यहां की रौनक है और इसी से यहां के पहाडो में हरियाली भी । कहते हैं कि भगवान ने इसे अपने नाखून से खोदकर बनाया था । बोटिंग के लिये नावें उपलब्ध हैं जिसमें आप झील का मजा ले सकते हो झील के पास एक जगह बनी है जहां बैठकर आप फोटो ले सकते हो और यहीं पर फोटोग्राफर भी बैठे रहते हैं राजस्थानी ड्रेस में फोटो खींचने के लिये । सबने यहां अपने फोटो मेरे कैमरे से खिंचवाये और इसके बाद मेरा एक फोन आ गया । मै फोन सुनने लगा और थोडा बिजी हो गया ।
एक सुंदर पेड का सुंदर नजारा
जब फोन काटा तो श्रीमति जी ने 150 रू मांगे मैने पूछा किसलिये तो बोली कि मैने पांच फोटो ड्रेस पहनकर खिंचवाये हैं । अब पैसे तो देने ही थे पर जब फोटो आये तो मैने सिेर पीट लिया क्योंकि फोटोग्राफर महाराज ने एक ही ड्रेस में पांच अलग अलग पोज लेकर 150 रू का बिना वजह बिल बना दिया था । मैने श्रीमति जी को समझाया कि अगर एक ड्रैस में फोटो खिंचाने के 30 रू हैं तो पांच अलग अलग ड्रैस में खिचाते बस फिर क्या था श्रीमति जी नाराज हो गई कि मेरे फोटो खिचवाने का नाम आता है तो तुम्हे परेशानी हो जाती है , 150 रू क्या मेरे से बढकर है वगैरा वगैरा और उसके बाद वो रोने भी लगी । मैने भी समझाया कि मेरा मकसद वो नही था जो तुमने समझ लिया पर फिर तो उस दिन पूरा दिन ना तो श्रीमति जी बोली ना मेरे पास बैठी ........
नक्की झील
चलो जी नक्की झील देखने के बाद गाइड हमें ले गया एक गार्ड्न में जो कि ओम शांति फाउंडेशन वालो का था । हमने आज तक काफी गार्डन देखे थे पर ये गार्डन थोडा अलग था । यहां जब हम अंदर पहुंचे तो गेट के पास ही एक जगह कुछ कुर्सिया पडी थी और उस पर बैठना था । बैठने के बाद जब कुछ और लोग आ गये तो वहां पर मौजूद एक शख्स ने बोलना शुरू किया कि यहां आप जिस गार्डन को देखने आये है उसको देखने की फीस लगती हैं और वो फीस ये है कि आपको पांच मिनट हमारी बात सुननी पडेगी । कोई महंगा सौदा तो था नही सो हमने पांच मिनट तक उनके ओम शांति के पंथ के बारे में सुना और उसके बाद उन्होने हमें अंदर प्रवेश करने दिया । बागीचा काफी बडा था और बडी ही मेहनत से बनाया गया था । ऐसे पहाडो में जहां पानी की किल्लत हो वहां इतना विशाल गार्डन बनाना और उसे मैंटेन रखना वाकई हिम्मत का काम है ।इस पार्क का नाम पीस पार्क था जो कि ब्रहमकुमारी ईश्वरीय विश्वविदयालय वालो ने बनाया है । माउंट आबू गुजरात की सीमा से बहुत पास में है और सिरोही जिले में अरावली पर्वतमाला में समुद्र तल से 1220 मी0 की उंचाई पर स्थित है । यहां साल में ज्यादातर समय मौसम ठंडा रहता है । यहां पहुंचने के लिये नजदीकी रेलवे स्टेशन आबू रोड है जो पहाडो की तलहटी में स्थित है और रेलवे लाइन पार करते ही पहाडो की चढाई शुरू हो जाती है जो कि किसी भी हिल स्टेशन की तरह घुमावदार रास्तो से होती हुई मन मोह लेती है । नजदीकी एयरपोर्ट उदयपुर ही है जो कि 185 किमी0 दूर है
नक्की झील पर त्यागी जी
पानी और बोटिंग की स्थिति आप देख सकते हैं
पहाडो की तलहटी में झील
रास्ते के पहाड
प्रजापिता ब्रहमकुमारी वालो का मुख्य भवन
एक बडा अच्छा शिवलिंग था
ये भी वहां फोटो खिंचवाने आई थी
ये माउंट आबू का मेन चौक
इसी फोटो के उपर हमारी लडाई हो गयी थी

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यहां के आबू पर्वत के बारे में कहा जाता है कि यहां हिंदुओ के 33 करोड देवी देवता निवास करते हैं काफी आकर्षक पार्क था जिसमें पेड पौधो की कई प्रजातियो के अलावा कहीं झूले पडे थे तो कहीं बहुत बडा ओम बना हुआ था जिसके नीचे सब फोटो खिंचवाने के लिये तैयार थे । झूलो को देखकर तो हमारे मास्टर जी भी विचलित हो गये और उन्होने और आंटी जी दोनो ने काफी देर तक झूलो का आनंद लिया । इस पीस पार्क को देखने के बाद हम लेाग ओम शांति यानि ब्रहमकुमारी विश्वविद्यालय को देखने गये जहां काफी बडा हाल है जिसमें सभा होती है तो 3 से 4 हजार लोग बैठ सकते हैं । अभी हमारा माउंट आबू का सफर बाकी था और आपको एक विशेष और बहुत ही सुंदर जगह दिखानी है सो मेरे अगले भाग का इंतजार करें और बतायें कि ये लेख आपको कैसा लगा आपकी प्रतिक्रियाओ का इंतजार रहेगा

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